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12 नवंबर, 2011

साइबर क्राइम अक्षम्य अपराध ..नहीं समझेंगे तो सजा तो मिलना ही चाहिए {१}

जी हाँ दोस्तों में अपना वायदा निभाने आ गया हूँ कहते हैं के कोई भी काम करो तो चेतावनी देकर ही करो ..पहले अपने भाइयों और परिवारजनों को समझायश करो उन्हें नफे नुकसान के बारे में समझाओ और अगर वोह फिर भी नहीं माने तो इस मामले में फिर कार्यवाही करो ताकि अपनों को सजा की तकलीफ में देख कर फिर खुद को दुक्ख ना हो क्योंकि वोह एक इंसाफ होगा ........दोस्तों मेने राष्ट्रपति महोदय को एक पत्र लिखा था जिन्होंने आर पी एस ई /ई /२०११/१७२३८ नम्बर पर शिकायत दर्ज की और इसकी जाँच शुरू करवा दी है ..इस मामले में राष्ट्रपति भवन भी सतर्क हो गया है और वहां से सभी सम्बन्धित अधिअक्रियों को इस साबर क्राइम को रोकने के लियें सख्त हिदायत दी गयी है ............दोस्तों सामाजिक ढाँचे में प्रचलित नियमों ..प्रथाओं.रुदियों ..जन्रितियों .सामजिक मापदंडों के खिलाफ जो भी कार्य निर्धारित नियमों के तहत किया जाता है और इस कृत्य से किसी को नुकसान पहुंचे या न पहुंचे अपराध कहलाता है और समाज के दो ही हिस्से है एक अपराधी और एक निरपराधी जो लोग अपराधी हैं उन्हें चाहे कितनी ही कोशिश कर लें एक दिन दंड भुगतना ही पढ़ता है ..........आप सभी जानते है के समाज में परिवर्तन प्रक्रति का नियम है समाज जेसे विकसित होता है अपराध और अपराधियों के तोर तरीके भी बदलते रहते हैं .वर्तमान में इक्कीसवीं सदी सुचना क्रान्ति का युग है हर तरफ कम्प्यूटर इंटरनेट का जाल फेला है ..माउस दबाओं पलक झपको विश्व के हर कोने से आप और हम जुड़ जायेंगे इस तकनीक का देश और विश्व के अनेक लोग लाभ ले रहे है लेकिन हर सुविधा का उपयोग ..सदुपयोग और दुरूपयोग सभी होता है ..यहाँ कुछ लोग है जो इस तकनीक का दुरूपयोग कर समाज में हिंसा अफ़ला रहे है समाज को बाँट रहे है समाज को ठगने का प्रयास कर रहे हैं ......आज विश्व में साइबर स्पेस के माध्यम से विश्व जुडा हुआ है इसका उपयोग ई गवर्नेस ..ई कोमर्स ..ई बिजनेज के रूप में होने लगा है साहित्यकार रचनाकार और पत्रकार भी इसका खूब लाभ उठा रहे है लेकिन वर्तमान में साइबर क्राइम के कारण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं का एक बहुत बढ़ा खेमा दुःख है ..निरंतर साइबर क्राइम में वृद्धि हो रही है खासकर भारत को इन अपराधियों ने चारा गाह समझ लिया है २६ नोव्म्ब्र २००८ की मुंबई आतंकवादी घटना इंटरनेट दुरूपयोग का ही नतीजा थी ..और अभी भी साइबर क्राइम आतंकवाद लगातार चल रहा है कई लोग हंसी खेल ठिठोली में दोस्तों और अज्ञात लोगों को परेशान करने में लगे हैं फर्जी आई ड़ी लगाते है फोटू छुपाते है ओरफिर सोचते हैं के जिस तरह से शतुरमुर्ग रेट में अपना सर छुपा कर यह सोचता है के उसे कोई नहीं देख रहा है इसी तरह से खुद को छुपा हुआ समझते है लेकिन दोस्तों आज तकनीक बहुत आगे निकल गयी है आप किस मोहल्ले किस गली में बेठ कर इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे है सब पता लगाया जा सकता है ऐसे में किसी का भी खुद को छुपाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है ...........गूगल ..फेसबुक..याहू सभी अपना साम्राज्य लेकर बेठे हैं उसके इंजीनियर सब जानते है लेकिन हम और हमारे इंटरनेट अपराधी हैं के नहीं मानते हैं ... कम्प्यूटर इंटरनेट और सहयोगी उपकरणों का प्रयोग कर अपराधिक कृत्य करना साइबर क्राइम की श्रेणी में आता है और इसमें अलग अलग दंड की व्यवस्था है वर्ष २००० से सुचना प्रोद्ध्योगिकी अधिनियम लागु है यद्धपि हमारे देश में इस कानून में आवश्यक संशोधनों की जरूरत है लेकिन हमारे देश की दंड संहिता और दुसरे कानून इस अपराध को रोकने के लियें पर्याप्त हैं ....साइबर अपराधों को सुनने के लियें विशेष कोर्टों की स्थापना की गयी है जेसे कंट्रोल ऑफ़ सर्तिफ़ाइन्ग ऑथोरिटी ..साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल ॥ ई कोर्ट ..साइबर थानों की स्थापना है .....लेकिन हमारे पास अभी इस साइबर क्राइम को कंट्रोल करने के मामले में इच्छा शक्ति की कमी है एक तो हमे देश के अपराधों से कोई लेना देना नहीं समाज को सूधारने में हमारी रूचि नहीं सबको अपनी पढ़ी है फिर कोई नंगा नाचे या अपराध करे किसी को कोई फर्क नहीं पढ़ता इसलियें इसकी सूचनाये नहीं पहुंच पाती है अभी वर्तमान में राहुल गाँधी के नाम से फर्जी आई ड़ी बनाकर दुष्प्रचार करने वाले को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है रोज़ देश में अश्लील प्र्कष्ण और धमकियां देने वाले गिरफ्तार होते है वर्तमान में इंटरनेट पर चुनाव क्रान्ति है चुनाव प्रचार के साथ साथ एक दुसरे के नेताओं का मान मर्दन भी मर्यादाओं को लाँघ कर किया जा रहा है सोनिया ..राहुल ..मनमोहन और नरेंद्र मोदी के अश्लील चित्र और आपत्तिजनक चित्र ट्रिक फोटोग्राफी से बनाये जा रहे है तो फिर इस अपराध को रोकने के लियें तो हमें और आपको ही आगे आना होगा न मुझे इस काम में आपकी मदद सहयोग की जरूरत है करोगे ना .......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

04 नवंबर, 2011

में तो अकेला चला था जानिबे मंजिल ................


जी हाँ जनाब किसी ने कहा है के में तो अकेला चला था जानिबे मंजिल लोग चलते गये और कारवां बनता गया सही कहावत है कहते है कोई काम नहीं है मुश्किल जब किया इरादा पक्का ....दोस्तों में इंटरनेट और कम्प्यूटर की ऐ बी सी डी से भी वाकिफ नहीं हूँ ..और हकीक़त यह है के में इंटरनेट या कम्प्यूटर पर हिंदी टाइपिंग भी नहीं जानता हूँ भला हो गूगल सेवाओं का जिनके कारण में अपनी भावना हिंदी भाषा में लिख कर आप लोगों के सामने प्रदर्शित कर रहा हूँ ..मेर बेटे शाहरुख खान ने जब मई २०१० में मेरा ब्लॉग बनाया तो मुझे पता नहीं था के मुझे फेस बुक को भी फेस करना होगा और गूगल की जी मेल सेवा का भी मुझे लाभ प्राप्त होगा ..दोस्तों में हिंदी ब्लोगिंग करता रहा मेरी कभी आलोचना हुई तो कभी मुझे सराहा गया में फेस बुक से जुड़ा मुझे एक जूनून स्वर हुआ के में बहुत जल्द फेसबुक के पांच हजार दोस्तों की हद पर कर लूँ और आप लोगों के आशीर्वाद से फेसबुक पर में आज पांच हजार मित्रों की हदें बहुत काम वक्त में पार कर चूका हूँ यह सब आप दोस्तों और भाइयों बहनों के प्यार के कारण ही संभव हो सका है दोस्तों मेरा सपना है के में हिंदी ब्लोगिंग में भी सबसे तेज़ लिक्खड़ की तरह कम वक्त में पांच हजार पोस्टें लिखने वाला लिक्खड़ ब्लोगर बन जाऊं ..........मुझे याद है मुझे बेस्ट ब्लोगर भाई ललित शर्मा मिले थे और जब मेरी पांच सो पोस्टें पूरी हुईं तो में ख़ुशी से फुला नहीं समा रहा था तब मुझे भाई ललित शर्मा ने ब्लोगिंग की ऐ बी सी डी से अवगत कराते हुए साहस दिलाया के पांच हजार पोस्ट लिखो तो मुझे बताता में खुद तुम्हारे ऊपर पोस्ट लिखूंगा दोस्तों बात निकली थी ब्लोगिंग समझ से लेकिन दिल को चुभ गयी और तब से में अपने महत्वपूर्ण कामों को भी नज़र अंदाज़ कर जब भी मुझे फुर्सत मिली लिखता रहा लिखता रहा और आज मुझे गर्व है के मेरे ब्लॉग के ४८०० आर्टिकल पुरे हो गये है और खुदा ने अगर मुझे ज़िंदा रखा और सब कुछ ठीक चलता रहा तो वर्ष २०११ में दिसम्बर तक में पूरी पांच हजार पोस्ट पूरा कर सबसे तेज़ लिखने वाला लिक्खड़ बन सकूंगा इस दोड़ में में अकेला ही नहीं हूँ मुझे कभी दिनेश राय द्विवेदी जी ने झकझोरा तो कभी भाई अनवर जमाल ..भाई मासूम ..भाई रमेश सिरफिरा .....भाई शाहनवाज़ ..बहन रश्मि शर्मा ..वन्दना गुप्ता सहित करिव पञ्च सो से भी अधिक ब्लोगर साथियो ने मुझे हिमात दिलाई और में आज इस दोड़ में अव्वल हूँ और एक अव्वल रिकोर्ड बनाने के प्रयास में हूँ खुदा करे भाई ललित शर्मा का आशीर्वाद में पूरा कर सकूं और इसी वर्ष २०११ में पूरी पांच हजार पोसते लिख सकूं देखिये अभी मेरी कुल ४८०० पोस्टें पूरी हुई है मेरे पास कहने वक्त है अगर कुदरत ने मुझे वक्त दिया और सब कुछ ठीक रखा तो खुदा मुझे कामयाब कर देगा और में खुद अपनी कामयाबी पर हेरान सा मेरे दोस्तों भाइयों और बहनों के प्यार मोहब्बत और मार्गदर्शन का एहसानमंद होकर उनके बोझ तले खुद को खुशनसीब समझता रहुगा काश ऐसा हो जाए और जल्दी से जल्दी हो जाए ........................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

18 अक्टूबर, 2011

नवभारत टाइम्स पर भी "सिरफिरा-आजाद पंछी"

नवभारत टाइम्स पर पत्रकार रमेश कुमार जैन का ब्लॉग क्लिक करके देखें "सिरफिरा-आजाद पंछी" (प्रचार सामग्री)
क्या पत्रकार केवल समाचार बेचने वाला है? नहीं.वह सिर भी बेचता है और संघर्ष भी करता है.उसके जिम्मे कर्त्तव्य लगाया गया है कि-वह अत्याचारी के अत्याचारों के विरुध्द आवाज उठाये.एक सच्चे और ईमानदार पत्रकार का कर्त्तव्य हैं,प्रजा के दुःख दूर करना,सरकार के अन्याय के विरुध्द आवाज उठाना,उसे सही परामर्श देना और वह न माने तो उसके विरुध्द संघर्ष करना. वह यह कर्त्तव्य नहीं निभाता है तो वह भी आम दुकानों की तरह एक दुकान है किसी ने सब्जी बेचली और किसी ने खबर.        
अगर आपके पास समय हो तो नवभारत टाइम्स पर निर्मित हमारे ब्लॉग पर अब तक प्रकाशित निम्नलिखित पोस्टों की लिंक को क्लिक करके पढ़ें. अगर टिप्पणी का समय न हो तो वहां पर वोट जरुर दें. हमसे क्लिक करके मिलिए : गूगल, ऑरकुट और फेसबुक पर 

अभी तो अजन्मा बच्चा हूँ दोस्तो
घरेलू हिंसा अधिनियम का अन्याय
घरेलू हिंसा अधिनियम का अन्याय-2
स्वयं गुड़ खाकर, गुड़ न खाने की शिक्षा नहीं देता हूं
अब आरोपित को ऍफ़ आई आर की प्रति मिलेगी
यह हमारे देश में कैसा कानून है?
नसीबों वाले हैं, जिनके है बेटियाँ
देशवासियों/पाठकों/ब्लॉगरों के नाम संदेश
आलोचना करने पर ईनाम?
जब पड़ जाए दिल का दौरा!
"शकुन्तला प्रेस" का व्यक्तिगत "पुस्तकालय" क्यों?
आओ दोस्तों हिन्दी-हिन्दी का खेल खेलें
हिंदी की टाइपिंग कैसे करें?
हिंदी में ईमेल कैसे भेजें
आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें
अपना ब्लॉग क्यों और कैसे बनाये
क्या मैंने कोई अपराध किया है?
इस समूह में आपका स्वागत है
एक हिंदी प्रेमी की नाराजगी
भगवान महावीर की शरण में हूँ
क्या यह निजी प्रचार का विज्ञापन है?
आप भी अपने मित्रों को बधाई भेजें
हमें अपना फर्ज निभाना है
क्या ब्लॉगर मेरी मदद कर सकते हैं ?
कटोरा और भीख
भारत माता फिर मांग रही क़ुर्बानी

 कैसा होता है जैन जीवन
मेरा बिना पानी पिए का उपवास क्यों?
दोस्ती को बदनाम करती लड़कियों से सावधान
शायरों की महफिल से
35. क्या है हिंसा की परिभाषा ? 
36. "सच" का साथ मेरा कर्म व "इंसानियत" मेरा धर्म 
37. "सच" का साथ मेरा कर्म व "इंसानियत" मेरा धर्म है-2 
 38. शुभदीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ !
 39. नाम के लिए कुर्सी का कोई फायदा नहीं
40. आप दुआ करें- मेरी तपस्या पूरी हो
41. मुझे 'सिरफिरा' सम्पादक मिल गया 
42. मेरी लम्बी जुल्फों का अब "नाई" मलिक 
43. दुनिया की हकीक़त देखकर उसका सिर-फिर गया  
44.कोशिश करें-ब्लाग भी "मीडिया" बन सकता है 
45.मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह
47. कौन होता है आदर्श जैन?
48. अनमोल वचन-दो  
49. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने पर...
 50. सिरफिरा पर विश्वास रखें 
51. अनमोल वचन-तीन 
52. मद का प्याला -"अहंकार" 
53. अनमोल वचन-चार 
54. मैं देशप्रेम में "सिरफिरा" था, हूँ और रहूँगा 
55. जन्म, मृत्यु और विवाह 
56. दिल्ली पुलिस में सुधार करें
 57. नेत्रदान करें, दूसरों को भी प्रेरित करें.
58. अभियान-सच्चे दोस्त बनो
59. दोस्ती की डोर बड़ी नाजुक होती है
60. फ्रेंड्स क्लब-दोस्ती कम,अश्लीलता ज्यादा
 क्लिक करें, ब्लॉग पढ़ें :-मेरा-नवभारत टाइम्स पर ब्लॉग,   "सिरफिरा-आजाद पंछी", "रमेश कुमार सिरफिरा", सच्चा दोस्त, आपकी शायरी, मुबारकबाद, आपको मुबारक हो, शकुन्तला प्रेस ऑफ इंडिया प्रकाशन, सच का सामना(आत्मकथा), तीर्थंकर महावीर स्वामी जी, शकुन्तला प्रेस का पुस्तकालय और (जिनपर कार्य चल रहा है) शकुन्तला महिला कल्याण कोष, मानव सेवा एकता मंच एवं  चुनाव चिन्ह पर आधरित कैमरा-तीसरी आँख 

29 सितंबर, 2011

क्या यह विज्ञापन है

पूरा लेख यहाँ पर क्लिक करके पढ़ें क्या यह विज्ञापन है?

दोस्तों, आज आपको एक हिंदी ब्लॉगर की कथनी और करनी के बारें में बता रहा हूँ. यह श्रीमान जी हिंदी को बहुत महत्व देते हैं. इनके दो ब्लॉग आज ब्लॉग जगत में काफी अच्छी साख रखते हैं. अपनी पोस्टों में हिंदी का पक्ष लेते हुए भी नजर आते हैं. लेकिन मैंने पिछले दिनों हिंदी प्रेमियों की जानकारी के लिए इनके एक ब्लॉग पर निम्नलिखित टिप्पणी छोड़ दी. जिससे फेसबुक के कुछ सदस्य भी अपनी प्रोफाइल में हिंदी को महत्व दे सके, क्योंकि उपरोक्त ब्लॉगर भी फेसबुक के सदस्य है. मेरा ऐसा मानना है कि-कई बार हिंदी प्रेमियों का जानकारी के अभाव में या अन्य किसी प्रकार की समस्या के चलते मज़बूरी में हिंदी को इतना महत्व नहीं दें पाते हैं, क्योंकि मैं खुद भी काफी चीजों को जानकारी के अभाव में कई कार्य हिंदी में नहीं कर पाता था. लेकिन जैसे-जैसे जानकारी होती गई. तब हिंदी का प्रयोग करता गया और दूसरे लोगों भी जानकारी देता हूँ.जिससे वो भी जानकारी का फायदा उठाये. लेकिन कुछ व्यक्ति एक ऐसा "मुखौटा" पहनकर रखते हैं. जिनको पहचाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती हैं. आप आप स्वयं देखें कि-इन ऊँची साख रखने वाले ब्लॉगर के क्या विचार है उपरोक्त टिप्पणी पर. मैंने उनको जवाब भी दे दिया है. आप जवाब देकर मुझे मेरी गलतियों से भी अवगत करवाए. किसी ने कितना सही कहा कि-आज हिंदी की दुर्दशा खुद हिंदी के चाहने वालों के कारण ही है. मैं आपसे पूछता हूँ कि-क्या उपरोक्त टिप्पणी "विज्ञापन" के सभी मापदंड पूरे करती हैं. मुझे सिर्फ इतना पता है कि मेरे द्वारा दी गई उपरोक्त जानकारी से अनेकों फेसबुक के सदस्यों ने अपनी प्रोफाइल में अपना नाम हिंदी में लिख लिया है. अब इसको कोई "विज्ञापन' कहे या स्वयं का प्रचार कहे. बाकी आपकी टिप्पणियाँ मेरा मार्गदर्शन करेंगी.
नोट: मेरे विचार में एक "विज्ञापन" से विज्ञापनदाता को या किसी अन्य का हित होना चाहिए और जिस संदेश से सिर्फ देशहित होता हो. वो कभी विज्ञापन नहीं होता हैं...

24 सितंबर, 2011

अनपढ़ और गंवारों के समूह में शामिल होने का आमंत्रण पत्र

दोस्तों, क्या आप सोच सकते हैं कि "अनपढ़ और गँवार" लोगों का भी कोई ग्रुप इन्टरनेट की दुनिया पर भी हो सकता है? मैं आपका परिचय एक ऐसे ही ग्रुप से करवा रहा हूँ. जो हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु हिंदी प्रेमी ने बनाया है. जो अपना "नाम" करने पर विश्वास नहीं करता हैं बल्कि अच्छे "कर्म" करने के साथ ही देश प्रेम की भावना से प्रेरित होकर अपने आपको "अनपढ़ और गँवार" की संज्ञा से शोभित कर रहा है.अगर आपको विश्वास नहीं हो रहा, तब आप इस लिंक पर "हम है अनपढ़ और गँवार जी" जाकर देख लो. वैसे अब तक इस समूह में कई बुध्दिजिवों के साथ कई डॉक्टर और वकील शामिल होकर अपने आपको फक्र से अनपढ़ कहलवाने में गर्व महसूस कर रहे हैं. क्या आप भी उसमें शामिल होना चाहेंगे?  फ़िलहाल इसके सदस्य बहुत कम है, मगर बहुत जल्द ही इसमें लोग शामिल होंगे. कृपया शामिल होने से पहले नियम और शर्तों को अवश्य पढ़ लेना आपके लिए हितकारी होगा.एक बार जरुर देखें.
"हम है अनपढ़ और गँवार जी" समूह का उद्देश्य-
इस ग्रुप में लगाईं फोटो मेरे पिता स्व.श्री राम स्वरूप जैन और मेरी माताश्री फूलवती जैन जी की है. जो अनपढ़ है. मगर उन्होंने अपने तीनों बेटों को कठिन परिश्रम करने के संस्कार दिए.जिससे इनके तीनों बेटे अपने थोड़ी-सी पढाई के बाबजूद कठिन परिश्रम के बल पर समाज में एक अच्छा स्थान रखते हैं. 
    इनके अनपढ़ और भोले-भाले होने के कारण इन्होने दिल्ली में आने के चार साल बाद ही अपनी बड़ी बेटी स्व. शकुन्तला जैन को दहेज लोभी सुसराल वालों के हाथों जनवरी,सन-1985 में गँवा दिया था और तब मेरे अनपढ़ माता-पिताश्री से दिल्ली पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों ने कोरे कागजों पर अंगूठे लगवाकर मन मर्जी का केस बना दिया. जिससे सुसराल वालों को कानूनरूपी कोई सजा नहीं मिल पाई. गरीबों के प्रति फैली अव्यवस्था और सरकारी नीतियों के कारण ही पता नहीं कब इनके सबसे छोटे बेटे रमेश कुमार जैन उर्फ सिरफिरा के सिर पर लेखन का क्या भुत सवार हुआ. फिर लेखन के द्वारा देश में फैली अव्यवस्था का विरोध करने लगा.     
हिंदी मैं नाम लिखने की भीख मांगता एक पत्रकार- 
मुझ "अनपढ़ और गँवार" नाचीज़(तुच्छ) इंसान को ग्रुप/समूह के कितने सदस्य अपनी प्रोफाइल में अपना नाम पहले देवनागरी हिंदी में लिखने के बाद ही अंग्रेजी लिखकर हिंदी रूपी भीख मेरी कटोरे में डालना चाहते है.किसी भी सदस्य को अपनी प्रोफाइल में नाम हिंदी में करने में परेशानी हो रही हो तब मैं उसकी मदद करने के लिए तैयार हूँ. लेकिन मुझे प्रोफाइल में देवनागरी "हिंदी" में नाम लिखकर "हिंदी" रूपी एक भीख जरुर दें. आप एक नाम दोंगे खुदा दस हजार नाम देगा. आपके हर सन्देश पर मेरा "पंसद" का बटन क्लिक होगा. दे दो मुझे दाता के नाम पे, मुझे हिंदी में अपना नाम दो, दे दो अह्ल्ला के नाम पे, अपने बच्चों के नाम पे, अपने माता-पिता के नाम पे. दे दो, दे दो मुझे हिंदी में अपना नाम दो. पूरा लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें.

13 सितंबर, 2011

जी हाँ ..में हिंदी यानी भारत माता की राष्ट्र भाषा हूँ ..

जी हाँ ..में हिंदी यानी भारत माता की राष्ट्र भाषा हूँ .....में संविधान की अनुसूची में शामिल हूँ .मुझे बोलना ..मुझे लिखना .मेरे साहित्य का प्रकाशन करना ..मेरे शब्दों में देश के सभी कानून कायदे प्रकाशित करना देश की सरकार की संवेधानिक ज़िम्मेदारी है .....आज़ादी से आज तक मुझे देश भर में लागू करवाने के लियें अरबों नहीं अरबों नहीं खरबों रूपये खर्च किये जा चुके हैं ...............लेकिन अफ़सोस में सिर्फ और सिर्फ सितम्बर महीने की १४ तारीख की एक यादगार बन गयी हूँ .मेरी भाषा में चलने वाले स्कूलों को सभी शिक्षाबोर्ड खासकर केन्द्रीय शिक्षा बोर्ड में उपेक्षित रखा गया है . विदेशी भाषा में गिटपिट करने वाले लोगों के बीच में अगर में फंस जाऊं तो मेरा ही नाम लेकर मेरी खिल्ली उडाई जाती है लोगों का उपहास और मजाक उढ़ाने पर मेरा नाम लेकर कहावत बनाई गयी है ..दोस्तों आपको तो सब पता है आप से क्या छुपाऊं जब किसी का मजाक उढ़ाया जाता है तो साफ तोर पर कहा जाता है के इसकी हिंदी हो गयी है .मेरे दुःख दर्द को न तो मेरे प्रधानमन्त्री ने समझा ना मेरे देश के राष्ट्रपति ने और नहीं सांसद विधायक मेरी तकलीफ समझ पाए हैं जनता का क्या कहें महाराष्ट्र में मुझे उपेक्षित किया है दक्षिण में अगर मुझे बोला जाये तो कोई बात नहीं करता बेल्लारी में अगर मुझे लागू करने की बात की जाए तो दंगे फसादात किये जाकर कत्ले आम हो जाते हैं .संविधान के रक्षकों की सांसदों वकीलों और जजों की बात करें तो वहां तो मेरा कोई वुजूद ही नहीं है ....मेरे देश मेरे भारत महान में सवा करोड़ लोग हैं और यकीन मानिये तीस करोड़ भी मुझे ठीक से बोलने और लिखने का दावा नहीं कर सकते हैं मेरा इस्तेमाल अगर केवल तीस करोड़ लोग करते हैं तो फिर में केसी राष्ट्रिय भाषा मेने देखा अल्पसंख्यक कल्याण के नाम पर देश में कथित योजनायें बनाकर अल्पसंख्यकों का जेसे शोषण हो रहा है धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का देश में जेसे ढिंढोरा पीट कर मनमानी की जा रही है गरीबी उन्मूलन का नारा देकर गरीबों पर जो अत्याचार क्या जा रहा है बस उसी तरह से देश में मेरे नाम पर राजनीति की जा रही है .अफ़सोस तो मुझे इस बात पर है के संसद में ५४४ सांसद और २७२ राज्यसभा सदस्यों में से गिनती के लोग हैं जो मुझे समझते हैं .सांसद में भाषण होता है तो अंग्रेजी में मशीने कन्वर्टर लगी हैं आम आदमी से हिंदी इस्तेमाल की बात की जाती है विधान में सातवीं अनुसूची की भाषा बना कर मेरा उपयोग आवश्यक किया जाता है लेकिन सांसद में न तो मेरी भाषा में शपथ ली जाती है और ना ही लिखा पढ़ी बात चीत की जाती है ..जितने भी लोग मेरे प्रचारक हैं सभी के बच्चे पैदा होते ही विदेशी भाषा अंग्रेजी के स्कूलों में पढने जाते हैं मेरी भाषा में चल रहे स्कुल बंद हों इसके लियें देश के सभी कोर्स की किताबें मेरी भाषा में छपवाना बंद कर दी गयीं है चाहे डॉक्टरी हो चाहे इंजीनियरिंग चाहे वैज्ञानिक हो चाहे कानून की पढाई..चाहे प्रबंधन की पढाई हो सभी तो विदेशी भाषा अंग्रेजी और अंग्रेजी में है फिर मुझे कोन और क्यूँ पसंद करेगा जब मुझे सांसद में बोलने के लियें पाबन्द नहीं किया जाता ..जब मुझे अदालतों में बोलने और लिखने के लियें पाबन्द नहीं किया जाता जब मुझे आधे से भी कम राज्यों और जिलों में बोला जाता है जब मेरे वित्तमंत्री ..कानून मंत्री ..मेरे देश को चलाने वाली सोनिया गाँधी मुझे नहीं समझती मुझे नहीं जानतीं मेरे देश के कोंग्रेस भाजपा या दुसरे कोई भी दल हो उनकी कार्यालय भाषा विदेशी अंग्रेजी है तो भाइयो क्यूँ मुझे हर साल यह दिवस बनाकर अपमानित करते हो या यूँ कहिये के कियूं मेरी हिंदी की और हिंदी करते हो ......अगर तुम्हे मुझसे प्यार हिया ....मुझे तुम इमानदारी से देश में लागू करना चाहते हो तो सबसे पहले देश में एक कानून हो जिसमें किसी भी चुनाव लड़ने वाले के लियें हिंदी जानना आवश्यक रखा जाए सभी प्रकार के चुनाव चाहे वोह लोकसभा हों .चाहे राज्यसभा ..चाहे विधानसभा चाहे पंच सरपंच चाहे पालिका चाहे कोलेज स्कूलों के चुनाव हों सभी के आवेदन पत्र हिंदी में हों और प्रत्याक्षी के द्वारा स्वयंम भरकर देना आवश्यक किया जाए सांसद और राज्यसभा .विधानसभाओं की भाषा केवल हिंदी हो और सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतों की भाषा हिंदी की हो ....देश में केंद्र और राज्य सरकार से सम्बंधित विभागों में हिंदी का ही चलन हो और सभी कर्मचारियों अधिकारीयों के लियें पाबंदी हो के वोह हिंदी के जानकर होंगे सभी प्रतियोगी परीक्षाएं हिंदी भाषा में ही ली जाएँ तब कहीं में थोड़ी बहुत जी सकूंगी वरना मुझे सिसका सिसका कर राजनीती का शिकार न बनाओ यारों ॥ मेरे देश के नोजवानों .मेरे देश के नेताओं ..मेरे देश के अन्ना ..मेरे देश के अन्ना समर्थकों ...मेरे देश के कथित राष्ट्रवादी लोगों .पार्टियों क्या तुम ऐसा कर सकोगे नहीं ना इसिलियिएन में कहती हूँ के मुझे बख्शो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो मेरे नाम पर हर साल करोड़ों रूपये बर्बाद कर गरीबों का गला मत काटो .......या तो मुझे इमादारी से लागू करो वरना दोहरा चरित्र निभाने वालों तुम चुल्लू भर पानी में ड़ूब मरो ....जय हिंदी .......जय भारत .......हम हिंदी है हिंदुस्तान हमारा क्योंकि सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा और सारे जहां से चोर बेईमान दगाबाज़ नेता हमारा .....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

12 सितंबर, 2011

गूगल, ऑरकुट और फेसबुक के दोस्तों, पाठकों, लेखकों और टिप्पणिकर्त्ताओं के नाम एक बहुमूल्य संदेश

दोस्तों, मैं हिंदी में लिखी या की हुई टिप्पणी जल्दी से पढ़ लेता हूँ और समझ भी जाता हूँ. अगर वहां पर कुछ लिखने का मन करता है. तब टिप्पणी भी करता हूँ और कई टिप्पणियों का प्रति उत्तर भी देता हूँ या "पसंद" का बटन दबाकर अपनी सहमति दर्ज करता हूँ. अगर मुझे आपकी बात समझ में ही नहीं आएगी. तब मैं क्या आपकी विचारधारा पर टिप्पणी करूँगा या "पसंद" का बटन दबाऊंगा? कई बार आपके सुन्दर कथनों और आपकी बहुत सुन्दर विचारधारा को अंग्रेजी में लिखे होने के कारण पढने व समझने से वंचित रह जाता हूँ. इससे मुझे बहुत पीड़ा होती है, फिर मुझे बहुत अफ़सोस होता है.अत: आपसे निवेदन है कि-आप अपना कमेंट्स हिंदी में ही लिखने का प्रयास करें.
 आइये दोस्तों, इस बार के "हिंदी दिवस" पर हम सब संकल्प लें कि-आगे से हम बात हिंदी में लिखेंगे/बोलेंगे/समझायेंगे और सभी को बताएँगे कि हम अपनी राष्ट्र भाषा हिंदी (और क्षेत्रीय भाषाओँ) को एक दिन की भाषा नहीं मानते हैं. अब देखते हैं, यहाँ कितने व्यक्ति अपनी हिंदी में टिप्पणियाँ करते हैं? अगर आपको हिंदी लिखने में परेशानी होती हो तब आप यहाँ (http://www.google.co.in/transliterate) पर जाकर हिंदी में संदेश लिखें .फिर उसको वहाँ से कॉपी करें और यहाँ पर पेस्ट कर दें. आप ऊपर दिए लिंक पर जाकर रोमन लिपि में इंग्लिश लिखो और स्पेस दो.आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा.जैसे-dhanywad = धन्यवाद.
 
दोस्तों, आखिर हम कब तक सारे हिन्दुस्तानी एक दिन का "हिंदी दिवस" मानते रहेंगे? क्या हिंदी लिखने/बोलने/समझने वाले अनपढ़ होते हैं? क्या हिंदी लिखने से हमारी इज्जत कम होती हैं? अगर ऐसा है तब तो मैं अनपढ़, गंवार व अंगूठा छाप हूँ और मेरी पिछले 35 सालों में इतनी इज्जत कम हो चुकी है, क्योंकि इतने सालों तक मैंने सिर्फ हिंदी लिखने/ बोलने/ समझने के सिवाय कुछ किया ही नहीं है. अंग्रेजी में लिखी/कही बात मेरे लिए काला अक्षर भैंस के बराबर है.
आप सभी यहाँ पर पोस्ट और संदेश डालने वाले दोस्तों को एक विनम्र अनुरोध है.आप इसको स्वीकार करें या ना करें. यह सब आपके विवेक पर है और बाकी आपकी मर्जी. जो चाहे करें. आपका खुद का मंच या ब्लॉग है. ज्यादा से ज्यादा यह होगा. आप जो भी पोस्ट और संदेश अंग्रेजी में डालेंगे.उसको हम(अनपढ़,अंगूठा छाप) नहीं पढ़ पायेंगे. अगर आपका उद्देश्य भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपना संदेश पहुँचाने का है और आपके लिखें को ज्यादा व्यक्ति पढ़ें. तब हमारे सुझाव पर जरुर ध्यान देंगे. आपकी अगर दोनों भाषाओँ पर अच्छी पकड़ है. तब उसको ध्दिभाषीय में डाल दिया करें. अगर संभव हो तो हिंदी में डाल दिया करें या फिर ध्दिभाषीय में डाल दिया करें.मेरा विचार हैं कि अगर आपकी बात को समझने में किसी को कठिनाई होती है. तब आपको हमेशा उस भाषा का प्रयोग करना चाहिए जो दूसरों को आसानी से समझ आ जाये. बुरा ना माने. बात को समझे. जैसे- मुझे अंग्रेजी में लिखी बात को समझने में परेशानी होती है.
हिंदी भाषा के साथ ही देश और जनहित में महत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा,यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. यहाँ पर क्लिक करके देखें कैसे नेत्रदान करना है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है.
 अपने बारे में एक वेबसाइट को अपनी जन्मतिथि, समय और स्थान भेजने के बाद यह कहना है कि-आप अपने पिछले जन्म में एक थिएटर कलाकार थे. आप कला के लिए जुनून अपने विचारों में स्वतंत्र है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में विश्वास करते हैं. यह पता नहीं कितना सच है, मगर अंजाने में हुई किसी प्रकार की गलती के लिए क्षमाप्रार्थी हूँ . हम बस यह कहते कि-आप आये हो, एक दिन लौटना भी होगा.फिर क्यों नहीं? तुम ऐसा करों तुम्हारे अच्छे कर्मों के कारण तुम्हें पूरी दुनियां हमेशा याद रखें.धन-दौलत कमाना कोई बड़ी बात नहीं, पुण्य/कर्म कमाना ही बड़ी बात है.
दोस्तों! मैं शोषण की भट्टी में खुद को झोंककर समाचार प्राप्त करने के लिए जलता हूँ फिर उस पर अपने लिए और दूसरों के लिए महरम लगाने का एक बकवास से कार्य को लेखनी से अंजाम देता हूँ. आपका यह नाचीज़ दोस्त समाजहित में लेखन का कार्य करता है और कभी-कभी लेख की सच्चाई के लिए रंग-रूप बदलकर अनुभव प्राप्त करना पड़ता है. तब जाकर लेख का विषय पूरा होता है. पूरा लेख पढने के लिए यहाँ क्लिक करें

07 सितंबर, 2011

आतंकवाद रोकने के लियें देश में अलग से आतंकवाद निरोधक मंत्रालय स्थापित करना आवश्यक

दोस्तों देश में सभी सुरक्षा प्रयासों के बाद भी अगर आये दिन अचानक बम विस्फोट से निर्दोषों की म़ोत होने लगे और यह सिलसिला इतने शक्तिशाली परमानुधारक देश में रोज़ की घटना बन जाए तो फिर तो हमे नींद से जागना होगा देश के आतंकवाद कारण जानकार उसकी तह तक पहुंच कर या तो आतंकवाद पनपने के कारणों को बातचीत से खत्म करना होगा और जो लोग बातचीत की भाषा नहीं जानते हैं उन्हें हमारे देश में हो तो यहाँ और दुसरे देश में हों तो वहां खोज खोज कर मारना होगा ........दोस्तों हमारा देश और हमारे देश के लोग रोज़ रोज़ के इस युद्ध से तंग आ गये हैं पर्दे के पीछे रहकर निर्दोषों की हत्या एक जघन्य काण्ड है और यह माफ़ी के लायक नहीं .........हमारे देश में आतंकवाद और दूसरी खबरों की पूर्व सूचनाये एकत्रित करने के लियें कई जांच एजेंसिया कार्यरत हैं उनका कार्य घटनाओं को क्रियान्वित करने के प्रयासों को निष्फल करने के लियें सूचनाये एकत्रित करना और ऐसे लोगों को धर दबोचना है लेकिन आप और हम जानते हैं के यह एजेंसियां अब राजनितिक उतार चढाव और आन्दोलन कारियों उनके मुद्दों और उनके नतीजों पर भी आंकड़े और सूचनाये एकत्रित करने में लग गये हैं इनका उपयों राष्ट्र के लियें कम और देश की सत्ताधारी पार्टी के लियें अधिक होगया है एक तो इस राष्ट्रिय अपराध को सबसे पहले रोकना जरूरी है दुसरे हमारे देश में आतंकवाद क्या है .यह विभिन्न समाजों में अचानक क्यूँ पनप रहा है इसके कारण क्या है इसका निस्तारण केसे हो सकता है आतंकवाद से प्रभावित लोग कोन है उन्हें पुनर्वासित करने के लियें क्या योजना है आतंकवाद के दोषी लोगों को सज़ा दिलवाने के लियें सरकार और अधिकारीयों की क्या भूमिका है और आतंकवाद के लियें ज़िम्मेदार कारणों को केसे खत्म कर सकारात्मक माहोल बनाया जाए इन सभी प्रयासों के बाद भी अगर कोई समूह अपनी आतंकवादी हरकतों से बाज़ नहीं आता है तो उसे केसे जड मूल से नष्ट किया जाए ..अगर इसकी जड़े विदेश में हो तो वहां घुस कर आतंकवादियों को और आतंकवाद को पनाह देने वालों को केसे तबाह किया जाए इस पर विचार और कार्य के लियें देश में एक प्रथक से आतंकवाद मंत्रालय की स्थापना करना जरूरी हो गया हैं ...... हमारे कुरान में एक आयत सुरे तोबा है जिसको पढने के पहले बिस्मिला हिर्रहमा निर्राहीम नहीं पढ़ा जाता है यानी इस आयत को पढने के पहले खुदा का नाम नहीं लिया जाता है उसमे दुश्मन से केसे निपटना चाहिए उसका तरीका बताया गया है .श्री भगवत गीता में भी दुश्मन कोई भी हो उसका नरसंहार केसे किया जाए उस बारे आदेश दिया गया है ..तो दोस्तों हमारे नेताओं और अमेरिका के आगे नोकरों की तरह से घुग्घू बन कर रहने वाले लोगों को कुरान और गीता का पाठ पढ़ाया जाना जरूरी है अगर हमारा देश का दुश्मन किसी भी देश में जा कर छुपा हो और वोह देश हमे उस दुश्मन को ना दे तो उस देश से युद्ध करने उसे बर्बाद कर उस दुश्मन को सजा देने का कानून हमारे देश में पारित किया जाए और फिर इस काम में जो भी देश बाधा बने उसे भी दुश्मन मानकर खत्म कर दिया जाए ऐसा एलान हमे विश्व में करना होगा तब कहीं जाकर हमारे देश के लोग सुकून से जी सकेंगे हमारे देश के दुश्मन पाकिस्तान में छुपे हो हमे उनकी सारी करतूतों की जानकारी हो हमारे पास सबूत हों और हम अमेरिका से पूंछे के देख लोग उसे समझा लो और अमेरिका हमे समझाए के बातचीत से मामला सुलझा लोग और चुप बेठ जाए अगर ऐसा होता रहा तो फिर हमे ऐसे हमलों से सिर्फ भगवान खुदा ही बचा सकता है ..तो दोस्तों हमे मजबूत होना होगा हमें ताकतवर बन कर विश्वव्यापी एलान करना होगा के अगर हमारे देश के किसी भी दुश्मन को किसी भी दुसरे देश ने पनाह दी तो उस देश का नक्शा हम मिटा देंगे और ऐसे एक दो करिश्मे कर के हमे बताना भी होंगे तब कहीं हम सुरक्षित रह पाएंगे वरना अमेरिका के आगे घुटने देख कर हम अगर अमन और सुकून की भीख मांगेंगे तो हमे सिर्फ और सिर्फ ठोकरों के सिवा कुछ ना मिलेगा ........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

06 सितंबर, 2011

ऐ मेरे देश के सांसदों थोड़ा शर्म करों क्या यही है संसद के विशेषाधिकार

दोस्तों जरा उठो और मेरे देश के इन बेशर्म सांसदों से जरा यह तो पूछ लो क्या संसद में रिश्वत लेकर वोट डालना ..रिश्वत लेकर सवाल पूंछना राष्ट्रहित से अलग हट कर संसद में अपनी पार्टी की गलत नीतियों की तरफ दुम हिलाना ....खर्राटें भरना या फिर बिना किसी वोट के संसद से बाई कोट कर देना ही तुम्हारा विशेषाधिकार हैं ...............दोस्तों मेरे देश के इन सांसदों को जेल में भरे पढ़े नेताओं के किस्से सुनाओ लालू का चारा ..अमरसिंह का संसद रिश्वत काण्ड ..झारखंड मुक्ति मोर्चा का रिश्वत काण्ड .संसद की जूतम पैजार ..रामजेठमलानी के फटेहाल कपड़े .....हर्षद मेहता का समर्थन .....क्या यही सब संसद का विशेषाधिकार है .दोस्तों अपने भी संसद देखी है आपने भी संसद पर हमले के वक्त संसद में दहाड़ने वाले इन लोगों की पतली दाल और दिल की धडकन देखी है हमारे देश में सर्वे करवा लो कुछ्द्र्जन सांसदों को अगर हम छोड़ दें तो सभी एक ही थाली के चाटते बट्टे हैं क्योंकि सो के लगभग जो सांसद देश का बन्टाधार कर रहे हैं उस मामले में यह लोग उनके खिलाफ जनहित में आवाज़ नहीं उठाते और जब जनता में इनकी छवि बिगडती है इनकी स्थिति बाहर बताई जाती है तो फिर यही लोग संसद के विशेषाधिकार के नाम पर खुन्नस खाकर जनता को सच बताने वालों को जेल डर दिखाते हैं अरे मेरे देश के सांसदों थोड़ा तो शर्म करो तुम सवा करोड़ लोगों की भावना से खेल रहे हो तुम में से कई ठीक लोग है तो कई कितने गंदे लोग है तुम भी तो जानते हो फिर क्यूँ ऐसे लोगों को संसद में आने से रोकने के लियें कानून नहीं बनवाते हो अगर ऐसा नहीं होता है और वेतन के मामले में तुम एक हो जाते हो जनता के हितों के मामले में धड़ों और पार्टियों में बंट जाते हो संसद में जनता के लियें जब कानून बन रहा हो तब तुम सो जाते हो .रिश्वत लेकर वोट डालते हो .रिश्वत लेकर सवाल पूंछते हो और वोह भी जनता के रुपयों पर जनता के टेक्स से दो करोड़ प्रतिवर्ष का खर्च लाखों का वेतन और दस रूपये का मुर्गा चिकन मटन खाते हो यानी हमारा खाते हो और हम पर ही गुर्राते हो जरा सुधरो अंतरात्मा को टटोलो राष्ट्रहित में इन सवालों का जवाब खोजो और जनता को कुछ करके दिखाओ जनता तो तुम्हे पलक पांवे बिछा कर कन्धों पर बिठाएगी और फिर कोई तुम्हारी तरफ ऊँगली भी उठाएगा तो जनता खुद ही उसकी ऊँगली काट देगी तो सांसदों जरा एक बार सिर्फ एक बार राष्ट्रहित और जनहित में तो सोचो यार तुम कहा गलत हो कहां तुम्हे सुधार करना है खुद ही समझ लोगे और संसद के विशेषाधिकार की बात करते हो तो जो आरोप तुम सांसदों पर लग रहे हैं जरा जन मत करा लो सवा करोड़ के सवा करोड़ को ही तुम्हे जेल भेजना होगा क्या कर सकोगे ऐसा सांसदों झूंठ मत बोलों खुदा के पास जाना है ......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

नल कटा आर एस एस का हाथ ..बिजली गुल आर एस एस का हाथ ..पेट में दर्द मुस्लिम तुष्टिकरण या फिर दाउद इब्राहिम का हाथ हां हाह

दोस्तों आज मेरे पडोस में रहने वाले एक कोंग्रेसी नेता द्वारा नल का बिल जमा नहीं कराने के कारण कनेक्शन काट दिया गया .मेने उससे कहा के यार तुम तो कोंग्रेसी कार्यकर्ता हो सरकार भी कोंग्रेस की है तुम्हारा कनेक्शन केसे कट सकता है जरा सोचो कहीं इसमें आर एस एस का हाथ तो नहीं ..........थोड़ी देर में एक पड़ोसी कोंग्रेसी नेता आया उससे उसने कहा के भाई आपने सिफारिश नहीं की और मेरा कनेक्शन कट गया कोंग्रेसी नेता का वही रता रटाया जवाब भाई मेने तो कोशिश की थी लेकिन आर एस एस की लोबी इतनी हावी थी के उन्होंने अपनी मनमानी कर ली .यह सुन कर में घर आया तो मेरी लाईट बंद थी ..मेने भी सोचा के इसमें भी आर एस एस का हाथ है .मेरे घर का पंखा खराब था काम करने वाली बाई की तबियत खराब होने से वोह नहीं आई थी मेने सोचा इसमें भी आर एस एस का हाथ है॥ ..दोस्तों हमारा देश भी अजीब है किसी भी घटना या कर्यक्रम के पीछे कोन हैं सभी को पहले से पता रहता है लेकिन कोई करता कुछ भी नहीं है .देश में कुछ भी होजाए पाकिस्तानी साज़िश है ..बम फटे दाउद का हाथ है , किसी भी आतंकवादी घटना में मुस्लिम आतंकवादी घटना का हाथ है किसी भी आर एस एस वाले के लियें यह कह भर देना आसान होता है ...............अब दस्तूर बदल गया है अन्ना आन्दोलन करें तो आर एस एस .रामदेव काले धन की बात करें तो आर एस एस ..बम फटे तो आर एस एस कोई भी घटना हो तो आर एस एस .भाई इस देश को कोन समझाये कोई भी संगठन ओई भी पार्टी कोई भी धर्म कोई भी जाती कोई भी समुदाय पूरा का पूरा खराब नहीं होता है किसी दल की संगठन से जुड़े किसी एक व्यक्ति की काली करतूत हो तो उसके लियें सारे धर्म सारे समुदाय को ज़िम्मेदार नहीं ठराया जा सकता लेकिन आजकल सरकार के खिलाफ कोई भी आन्दोलन हो कोई भी पर्दाफाश हो बस एक रटा रटाया आरोप इसके पीछे आर एस एस और साम्प्रदायिक ताकतों का हाथ है ..मुसलमानों को हिफाजत की बात हो तो आर एस एस कहती है के कोंग्रेस की तुष्टिकरण है इस आरोप प्रत्यारोप में जनता का बुरा हाल है देश के हालात फटेहाल हैं और नेता हैं के फाइव स्टार होटलों में अपने बंगलों में सर्व दलीय बैठकों के नाम पर मजे कर रहे हैं एक दुसरे से गले मिल रहे हैं और जनता को आरोप प्रत्यारोप लगा कर उल्लू बना रहे हैं भाई में तो सोचता हूँ देश में जो कुछ भी हो रहा है उसमे कोंग्रेस के हिसाब से तो आर एस एस और हिन्दू आतंकवादियों का हाथ है और भाजपा आर आर एस के हिसाब से कोंग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की निति ..अफज़ल गुरु को फंसी नहीं देने की नियत .दाउद इब्राहीम ..छोटा शकील और पाकिस्तान की आई एस आई का हाथ है कभी कभी सी आई ऐ का भी हाथ हो जाता है तो भाई देश में कोई भी आरोपी नहीं सब बहर वालों के हाथ हैं ऐसे में देश के लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को तो चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए क्योंकि शर्म तो इनको किसी भी कीमत पर आती नहीं .....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

04 सितंबर, 2011

अन्ना ने सरकारी जासूसी के सभी प्रयास निष्फल कर दिए है

अन्ना ने सरकारी जासूसी के सभी प्रयास निष्फल कर दिए है अब सरकार अन्ना की जासूसी को लेकर पशोपेश में हैं ....सरकार ने घोषणा की थी की ख़ुफ़िया रिपोर्टों के आधार पर अन्ना की जान को खतरा है इसलियें उन्हें जेड सुरक्षा दी जान चाहिए अन्ना समर्थकों को डर था की अन्ना निति की हर बात अब यह सुरक्षा कर्मी सरकार तक पहुंचाते रहेंगे और सरकार वक्त से पेहले ही सतर्क होकर अन्ना की हर चाल को पूर्व सतरक्त्ता निति के तहत विफल कर देंगे ....पहला सवाल अन्ना से सिर्फ सरकार और सर्कार के कुछ मंत्री नाराज़ हैं जिनकी गिनती उँगलियों पर है फिर उनकी जानको खतरा इन लोगों के अलावा और किस से हो सकता है .ख़ुफ़िया एजेंसियों की रिपोर्ट अगर है तो वोह ऐसे प्रयास कर्ताओं का खुलासा जनता के सामने करे उन्हें पकड़ने का प्रयास करे दूर रहकर अन्ना की सुरक्षा करे लेकिन जासूसी मंज़ूर नहीं .........शायद इसीलियें अन्ना ने काफी सोच कर सरकार को जवाब दिया है के उन्हें सुरक्षा नहीं चाहिए वोह देश के लियें अगर मर भी जाएँ तो उन्हें चिंता नहीं है ...इस तरह से अन्ना ने सरकार के जासूसी फार्मूले की हवा निकाल दी है ...............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

हमारे देश के कुछ पदों पर बेठे लोग खुद को भगवान समझने लगे हैं

दोस्तों विश्व में जो भी जन्मा इंसान है वोह भगवान नहीं है और सच यह है के भगवान से गलतियाँ नहीं होतीं लेकिन इंसान गलतियों का पुतला होता है और इंसान से अगर गलती हो तो उसकी गलती सद्भाविक है या जानबूझ कर की गयी गलती है इसका पता लगाकर दोषी व्यक्ति को सज़ा देने से ही समाज में इमानदारी और सुरक्षा का संतुलन बन सकेगा .लेकिन दोस्तों विश्व की धरती पर एक हमारा देश हमारा हिंदुस्तान ऐसा है जहां कुछ ख़ास पदों पर बेठे लोगों ने खुद को भगवान समझ लिया है इन इंसानों ने सोच लिया है के वोह तो भगवान है और वोह गलती नहीं करते अगर गलतियाँ वोह कर भी ले तो यह तो उनका हक है और इसीलियें इसके लियें ना तो उनके खिलाफ जांच हो सकती है और ना ही इसका उन्हें दंड दिया जाना चाहिए .....तानाशाही और साम्न्त्वदिता का यह बुखार किसी एक को नहीं प्रधानमन्त्री जी ..राष्ट्रपति जी ..जज साहिबान .सी वी सी के आयुक्त ..सांसद महोदय ..मंत्री महोदय ..अधिकारी महोदय सहित कई पदों पर बेठे लोग खुद को खुदा समझ बेठे हैं और वोह खुद की करतूतों की जांच के बारे में सहमत नहीं हो रहे हैं ......हमारे देश में यह लोग जनता के रूपये से अपने चड्डी से लेकर खाने के सामन खरीदते हैं इनके घर का खर्चा एशो आराम जनता के पेसे से आता हैं इनको पद पर बिठाने के पहले इन्हें सपथ दिलवाई जाती है और यह लोग इसी शपथ को तोड़ कर जब अपराध करते हैं तो इनका कोई कुछ नहीं बिगड़ सके इसलियें इनके खिलाफ बन्ने वाले कानूनों का यह विरोध करते हैं ........दोस्तों आप सभी जानते हैं अन्ना की भ्रष्ट लोगों को सजा दिलवाने की लड़ाई अभी सिर्फ शुरू हुई है और सरकार और चोर लोगों ने अपनी कलाई करतूतें शुरू कर दी हैं .....देश में आई पी सी और दुसरे कई कानून बने है जिसमे आम आदमी द्वारा किये गए अपराध के लियें उन्हें सजा देने का प्रावधान है और इन्हीं कानूनों में सभी दुसरे प्रभावशाली लोगों को भी दंडित करने का प्रावधान है लेकिन उन्हें विशेष दर्जा देकर उनके खिलाफ कार्यवाही के पहले सरकार से इजाजत जरूरी बताई है और देश के लाखों ऐसे मामले है के सरकार ने बेईमान भ्रष्ट लोगों के खिलाफ प्रमाणित अपराध होने के बाद भी उक्द्मे की अनुमति नहीं दी है ऐसे में अगर यह शर्त हटा कर आम आदमी को सीधे किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति चाहे वोह आम आदमी हो चाहे वोह प्रधानमन्त्री राष्ट्रपति या जज हो उसके खिलाफ परिवाद पेश कर कार्यवाही का मोका दिया जाए तो सभी लोगों में कानून का डर रहेगा और वोह भी अपना कम जनहित में ठीक तरह से करेंगे वरना पकड़े जाने पर उन्हें दंडित और लज्जित तो होना ही पढ़ेगा ....अब रहा सवाल झूंठे परिवाद पेश करने का तो हर मुकदमे में प्रसंज्ञान ,,चार्ज की स्टेज पर सुनवाई होती है अगर सबूत नहीं होंगे तो ऐसे लोग बरी हो जायेंगे और बरी होने पर मेलिशियास प्रोसिक्यूशन और मानहानि सहित क्षतिपूर्ति मामलों में ऐसे झूंठे परिवाद पेश करने वाले को भी दंडित करवाया जा सकेगा तो फिर यह पहल आज ही कर सभी कानूनों में कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा पेश करने के पहले सरकार या अधिकारी से स्वीक्रति की पाबंदी है या कुछ लोगों के खिलाफ मुकदमा पेश करने के पहले जो प्रोटेक्शन एक्ट बनाया गया है उस क्लोज़ को अगर हटा दिया जाए तो देश आज से ही स्वर्ग हो जाएगा आखिर यह कोनसा कानून है के देश की सवा करोड़ जनता में से कुछ ऊँचे पदों पर बेठे लोग उस कानून से मुक्त हो ऐसे कानून तो सिर्फ गुलामी और समंवादिता वाले जालिमों द्वारा ही बनाये जाते हैं ................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

03 सितंबर, 2011

आज़ादी की दूसरी लड़ाई में काले अँगरेज़ बाधक बन रहे हैं

जी हाँ दोस्तों एक आज़ादी की लड़ाई सभी ने मिलकर अंग्रेजों को भगाने के लियें लड़ी थी धरने दिए ..प्रदर्शन किये .गोलियां खायीं ..जेल में गए और फिर कहीं जाकर यह आज़ादी हमे मिली है लेकिन आज जब भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबे नेताओं खासकर सत्तापक्ष के लोगों से जनता मुक्ति मांग रही है देश से भ्रष्टाचार और कालाबाजारी के खिलाफ आवाज़ उठा कर काले धन को बाहर निकालने की बात कर रही है तब सत्ता पक्ष के लोग वही सब कुछ कर रहे है जो अंग्रेजों ने आज़ादी का आन्दोलन दबाने के लियें क्या ,,,,सत्ता पक्ष ने पहले काले धन के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले बाबा रामदेव को आना से लडाया फिर डिवाइड एंड रुल की निति पर सत्तापक्ष ने बाबा रामदेव से समझोता कर गले लगाया उन्हें रामलीला मैदान बेठने की जगह दी जब बात बिगड़ गयी तो फिर उनकी जलियावाला बाग़ जेसी गत बनाई गयी .उनके खिलाफ अचानक सत्तापक्ष ने सारी जांचें शुरू कर दी .इस जीत से सत्तापक्ष का सीना फुल गया और उसने समझा भ्रष्टाचार के खिलाफ जो भी बात करे उसे भ्रस्थ बताओ जेल में डालो ..अन्ना के साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया गया पहले अन्ना को डराया धमकाया फिर गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया लेकिन जब जनता की आवाज़ उठी तो सरकार दो कदम पीछे हटी और अन्ना और उनके समर्थकों के आगे अंग्रेजों की तरह नतमस्तक हो गयी सारे देश ने देखा के समझोते हुए दलालों को भेजा गया आन्दोलन के जो समर्थक थे उनकी हिट लिस्ट बनाई गयी और उन्हें सबक सिखाने उन्हें जेल का दरवाज़ा दिखाने के प्रयास तेज़ हो गये ..आन्दोलन के जो गद्दार बने सरकार का जिसने समर्थन किया उन्हें पुरस्कर्त करने की तय्यारी की गयी .............आज बाबा रामदेव के खिलाफ नोटिस उनके खिलाफ जांच अचानक उनके द्वारा काले धन के खिलाफ आवाज़ उठाने का नतीजा है वरना इसी सत्ता के लियें यह बाबा रामदेव भगवान थे ..अन्ना और उनके समर्थकों को सत्तापक्ष ने माथे पर बिठाया और फिर अचानक दूध में से मक्खी की तरह निकाल दिया .ताज्जुब तो यह है के सत्तापक्ष ने वोह अंग्रेजों की निति अपनाई जिसमे वोह डिवाइड एंड रुल की निति से देश को गुलाम बनाये रहे लेकिन अभी इन काले अंग्रेजों की सभी नीतिया फेल हो गयीं साम्प्रदायिकता ..अआर एस एस ..विपक्षी आन्दोलन कहकर आन्दोलन को दबाया बदनाम किया लेकिन वाह देश जिंदाबाद रहा और जनता जीत गयी घोषणा हो गयी लेकिन सत्तापक्ष तो काली अँगरेज़ है उसने केजरीवाल को सताया ..बाबा को उठाया ..अन्ना को भ्रष्ट कहा और किरण बेदी ..ओम,पूरी सहित प्रशांत भारद्वाज को जेल भेजने की धमकिया देकर कार्यवाहियां शुरू की इतना बखेड़ा होने के बाद भी सत्ता पक्ष को पछतावा नहीं है वोह अपनी गलतियाँ सुधारना नहीं चाहती है और एक रावण की तरह हरकतें कर रही है लेकिन उन्हें पता नहीं के दस सर वाले रावण का अंत करने के लियें अब राम का जन्म हो गया है और देश की सुक्ख शांति इमानदारी का जो हरण इस सरकार ने किया है उसे छुडाने के लियें अन्ना रामबाण और हनुमानों की वानर सेना को लेकर आ गये है फिर कुम्भ कारन हो चाहे शूर्पनखा हो चाहे रावण हो सभी को धाराशायी होना ही होगा इसलियें कहते हैं के वन्दे मातरम ..इन्कलाब जिंदाबाद .मेरा देश महान है मेरे देश की भोली भली जनता जब सडको पर आती है तो फिर यह मेरे देश की तरह ही महान हैं .....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

30 अगस्त, 2011

ऐसे हुई कोटा में ईद की घोषणा .................

दोस्तों कल ईद है पहले बिहार में चाँद दिखा फिर लखनऊ से चाँद दिखने की खबर आई लेकिन कोटा में बरसात होने के कारण चाँद दूर दूर तक दिख नहीं सका था और ईद की घोषणा तो चाँद देखने के बाद ही की जाने की शरियत है बस कोटा के लोगों के दिल थमे हुए थे और उन्हें शहर काजी अनवार अहमद के फेसले का इन्तिज़ार था .....में खुद भी शहर काजी अनवर अहमद का नजदीकी हूँ कोटा वक्फ कमेटी का नायब सदर और कानूनी सलाहकार के अलावा पत्रकारिता से जुडा हूँ इसीलिए मेरे फोन पर धन धनाधन घंटियाँ बजने लगी .हम खुद काजी साहब से चाँद दिखने की शहादत केसे लें और ईद केसे घोषित करें इसकी चर्चा में थे ...........इसी बीच मेरे पास बारां के वकील जनाब आफाक भाई का फोन आया उनका कहना था कोटा में तो चाँद नहीं दिखा लेकिन बूंदी में उनके रिश्तेदार ने चाँद देख लिया है इसकी खबर शहर काजी साहब कोटा को दी गयी ...शहर काजी कोटा ने बूंदी शहर काजी से राबता किया वहां चाँद दिखने की पुष्ठी हुई लेकिन चाँद दिखने की शरीयती साक्ष्य तो लेना थी ..शहर काजी साहब ने एक कार मंगवाई उसमे दो ज़िम्मेदार लोगों को चाँद देखने वालों से जिरह करने और उनकी गवाही लेने के लियें बूंदी भेजा गया बूंदी कोटा से चालीस किलोमीटर दूर दुसरा जिला है ....खेर ज़िम्मेदार लोग बूंदी पहुंचे इस दोरान कोटा के सभी लोगों के दिल थमे हुए थे क्योंकि कोटा में अनेकों बार चाँद की शहादत नहीं हाने पर ईद दुसरे दिन हुई है चाहे पुरे देश में कभी भी ईद मना ली जाए कुछ लोग एतेकाफ में बेठे थे जो मस्जिदों से उठना चाहते थे लेकिन ईद की घोषणा चाँद की शहादत पर होना थी .................बूंदी गए दोनों मोअज्जिज़ लोग शहादत लेकर वापस कोटा आये काज़ियात कार्यालय में इसे पेश किया गया शहर काजी ने फिर एक बार तस्दीक की और तस्दीक करने के बाद एक फरमान एक आदेश जारी कर कोटा में भी कल ईद की घोषणा करते हुए ईद की नमाज़ साढ़े नो बजे पढने की घोषणा की ..............ईद की घोषणा हो चुकी थी पटाखे फूट गए थे एलान होने लगा था इसी बीच मुबारक बाद के सिलसिले शुरू हो गये ..थोड़ी देर बाद कोटा के अनवरत ब्लोगर भाई दिनेश राय जी द्विवेदी का फोन आया उन्होंने ईद के बारे में पूंछा तो मेने सारी जानकारी दी उन्होंने सुझाव दिया के भाई ईद की इस घोषणा को कमसे कम ब्लॉग पर लिख कर लोगों तक पहुंचाएं मेने भाई दिनेश द्विवेदी जी को कल ईद पर आने की दावत दी ..दिनेश जी ने तपाक से जवाब दिया के मेरे तो बेटे और बेटी दोनों आधी रात को आ रहे है हमारी तो ईद उनसे ही होगी उनका कहना था के बच्चे राखी पर नहीं आये थे अब चार दिन कोटा में उनके साथ रहेंगे इसलियें हमारी तो चार दिन ही ईद रहेगी ..भाई दिनेश जी द्विवेदी जी की यह बात सुन कर में दुखी हो गया और में मेरी ईद के बारे में सोचने लगा क्योंकि मेरा इकलोता प्यारा बेटा शाहरुख कहां नोयडा अमिटी में बी टेक कम्प्यूटर साइंस में कर रहा है और छुट्टी नहीं होने के कारण उसे पहली बार हमसे अलग दूर ईद मनाना पढ़ रही है मेरी बस आँखे छलछला आयीं और भावुकता में बहकर एक बार फिर मेने अपने बच्चे शाहरुख को फोन कर ईद की मुबारक बाद दी जो दिल्ली में मेरी बहन केघर रोहिणी में ईद मनाने के लियें रास्ते में जा रहा था .........तो दोस्तों चाँद की शहादत से ईद की घोषणा और फिर ख़ुशी से उदासी के इस सफ़र की दास्ताँ आपके सामने पेश है सभी भाइयों को ईद की बहुत बहुत मुबारकबाद ...अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

23 अगस्त, 2011

जी हाँ में आज़ाद भारत का नेता हूँ .......

जी हाँ मेरे भारत वासियों
में आज़ाद भारत का नेता हूँ ।
जनता से सिर्फ और सर लेता ही लेता हूँ
कभी वोट लेता हूँ ..तो कभी ट्रांसफर कभी कोई काम कराने के पेसे लेता हूँ
संसद में में अगर पहुंचूं तो बस सवाल पूंछने के भी रूपये लेता हूँ
हां दोस्तों में भारत देश का नेता हूँ
में देश को देश की जनता को
सिर्फ और सिर्फ भ्रस्टाचार , बेईमानी , अनाचार ही देता हूँ
जी हाँ दोस्तों में आज़ाद भारत का नेता हूँ
में कहीं भी किसी भी पार्टी में रहूँ
सरकार किसी की भी हो
बस विपक्ष में रहूँ या सरकार में
आपसी सान्थ्गान्थ कर या तो संसद से वाक् आउट करता हूँ
या संसद ही नहीं जाता हूँ
अगर विश्वास मत के पक्ष में वोट डालना पढ़े
तो रिश्वत लेकर संसद में में कोई भी सरकार हो उसे बचाता हूँ
भ्रष्टाचार की जहां बात हो वहां खुद को गांधीवादी कहलवाता हूँ
संसद हो चाहे हो विधान सभा चाहे हो पंचायत
जब भी चुनाव होते हैं करोड़ों रूपये
पानी की तरह बहाता हूँ
वोट मांगने जाता हूँ तब जनता और वोटर होती है जनार्दन
और जब वोट लेकर नेता बन जाता हूँ
तो बस जनता अगर मिलने आये तो उसे पहचानने से इनकार कर भगाता हूँ
कोई खास जिद्दी मिलने वाला आ भी जाये तो रिश्वत नहीं देने पर
ऐसे आदमी को बिना काम किये नियमों का हवाला देकर टरकाता हूँ ।
अन्ना जेसे कोई ईमानदार आ भी जाएँ तो उन्हें भी
खुद की कुर्सी बचाने के लियें
कभी में उन्हें बेईमान कभी साम्प्रदायिक कभी हिन्दू विरोधी कभी मुस्लिम विरोधी कहकर
जनता को ऐसे लोगों के खिलाफ भड़काता हूँ
जी हाँ दोस्तों में आज़ाद भारत का नेता हूँ ।
देश को दीमक की तरह खा रहा हूँ
देश की योजनाये देश का बजट कमीशन खोरों के हवाले हैं
कभी में ऐ राजा तो कभी में कोमन वेल्थ का घोटालेबाज बन जाता हूँ
लेकिन मेरा आज तक कुछ बिगड़ा नहीं है
कभी बिगड़ेगा भी नहीं क्योंकि में आज़ाद देश का नेता हूँ
देश की भोली भली जनता को ऐसे ही बेवकूफ बनाता हूँ ..........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

20 अगस्त, 2011

हाँ में भारत की संसद हूँ ..मुझे शर्म आती है .............

हाँ में भारत की संसद हूँ .मुझे मेरी करतूतों पर कई बार शर्म आती है और इन दिनों तो में खुद अपनी करतूतों से शर्मसार हूँ .....मुझे मेरे देश मेरे भारत के लोगों ने उनकी हिफाजत ,सुरक्षा और कल्याण के लियें योजना बनाने के लिए चुना है ..मुझे गरीबी और भ्रष्टाचार दूर करने के लियें बनाया गया है लेकिन में इन सभी मामलों में नाकामयाब रही हूँ .मेरे ५४४ सदस्य है जो कभी भी किसी भी सेशन में कार्यकाल में उपस्थित नहीं रहे हैं ..जब भी किसी बिल को पास कराने या चर्चा के लियें मुझे इन लोगों की जरूरत पढ़ी तब यह लोग गायब मिले हैं कई लोग तो मेरे समक्ष रखे गये बिलों को खोल कर पढ़ भी नहीं पाए है कई ऐसे सदस्य हैं जिन्होंने एक भी सवाल नहीं किया है ..सदस्य आते है बैठते हैं ....और सस्ता खाना खाकर मजे लेकर चले जाते हैं यह लोग मुफ्त में मेरे यहाँ उपस्थित नहीं होते है अपनी उपस्थिति के लियें यह ख़ासा भत्ता लेते हैं .आने जाने का किराया खर्चा लेते हैं ठहरने का खर्चा लेते हैं ........दोस्तों मेने जो देखा है वोह बताते हुए मुझे अफ़सोस है इन लालची सदस्यों ने केवल खुद की तनख्वाह बढाने के मामले और भत्ते बढाने के मामले के विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया है ..लेकिन आरक्षण मामला ..महिला बिल ...लोकपाल बिल कई वर्षों से अटका पढ़ा है ...दोस्तों मेने देखा है यहाँ रोज़ जूतम पैजार ..गली ग्लोंच चीख पुकार और हाथापाई होती है तब मुझे लगता है के यह संसद है या सब्जी मंडी..दोस्तों मुझे जीतने के लियें मेरा विश्वास मत प्राप्त कर वापस सत्ता पाने के लियें सांसदों को नर्सिंम्माराओ ने रिश्वत दी पकड़े गए मुकदमा चला कुछ नहीं हुआ ..संसद में मनमोहन सिंह ने विशवास मत जीतने के लियें सांसदों को रिश्वत की पेशकश की ..रिश्वत की राशि मेरे कक्ष में लहराई गयी उडाई गयी मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन नतीजे के नाम पर सिफर ........मेरे अन्दर बेठ कर हिन्दुस्तान टाइम्स के सम्पादक बी जी वर्गिस को गिरफ्तार बुलाया गया खुद को सुप्रीम कोर्ट से बढा समझा गया ....मुझ पर पाकिस्तानी हमला हुआ आतंकवादी अंदर घुसे उनके डर से कई सांसद तो कई दिनों तक मुझे शक्ल तक दिखाने नहीं आये ...दोस्तों मुझे यह कहते हुए भी शर्म आती है के मेरे सदस्य सांसद लोगों से सवाल पूंछने की भी रिश्वत लेते हैं में जनता के प्रति जवाबदार हूँ लेकिन जनता को कीड़ा मकोड़ा समझने लगी हूँ मेरे सद्सस्य जनता के बीच नहीं जाते हैं उन्हें उनकी करतूतों की सजा देने वाला कोई नहीं है उन्हें मेरे कानूनों ने प्रोटेक्शन दे रखा है न तो वोह गिरफ्तार होते हैं ना ही उन्हें सजा मिलती है किसी चोर को चोर कहो तो संसद की अवमानना की कार्यवाही का डर बता कर ब्लेकमेल किया जाता है .दोस्तों मेने अरबों खरबों रूपये के घोटाले झेले है मेने देखा है के जब भी मत विभाजन होता है तो कुछ लोग गिनती की गणित बिगाड़ने के लियें एक पक्ष से फायदा लेकर संसद से गायब हो जाते है वोह संसद में डट कर वोटिंग नहीं करते हैं ......दोस्तों किसी भी बिल पर अगर कोई भी सांसद बिना किसी युक्तियुक्त कारण के अनुपस्थित रहे तो उसे सजा देने का कोई प्रावधान नहीं है जान बुझ कर वोट का बहिष्कार करे तो उससे जनता को सवाल पूंछने और संसद को उसे सजा देने का कोई कानून नहीं है दोस्तों में ६२ साल की बूढी हो गयी हूँ लेकिन देश को कुछ सार्थक नहीं दे पायी हूँ सांसदों को सुधार नहीं पायी हूँ में जनता की तो सुनती नहीं खुद को जनता द्वारा चुन कर जनता के लाभ के लियें बनाई गयी हूँ लेकिन हठधर्मिता देखो के किसी भी मामले में में जनता को बाहर का आदमी कहकर उसकी बात नहीं सुनती हूँ में खुद मेरी करतूतों से शर्मसार हूँ ..परेशान हूँ मुझे माफ़ करो ......अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

09 अगस्त, 2011

त्याग तपस्या बलिदान की ट्रेनिंग है रोजा

त्याग तपस्या बलिदान की ट्रेनिंग है रोजा

दोस्तों इस्लाम के जाने और मानने वालों के लियें यह महीना त्याग ,तपस्या और इबादत का है ..और सभी मुस्लिम भाई इस इबादत में लगे हैं खुदा करे उनकी यह दुआ कुबूल हो .कई लोग हमारे देश में ऐसे भी हैं जो दुसरे मजहब से जुड़े होने के बाद भी इस महीने का सम्मान रखते हुए रोज़े रख रहे हैं ..इबादत का यह महीना ट्रेनिंग का महीना भी कहलाता है इसमें एक मुसलमान को गरीब की भूख ,प्यास का अहसास होता है एक अनुशासन सिखाया जाता है सुबह उठाना फिर दिन भर इबादत करना सभी इन्दिरियों को वश में रख कर तहज़ीब के दायरे में आदर्श इंसान बन कर रहने की सीख़ ही रोजा और रमजान है .तीस रोजों की श्रंखला को रमजान कहते हैं जबकि एक रोज़े को रोजा यानी अहद प्रण कहते हैं इस दिन मुसलमान एक विशेह्स वक्त पार सूरज उगने से पहले नियत करता है और फिर सूरज डूबने तक खुद को खुदा के बताये हुए रास्ते पार चलने वाला बना कर खुदा को समर्पित कर देता है ..आँख नाक , कण ,यानि सभी इन्द्रियों को वश में रख कर बुराई से बचता है और दिन भर अपने देनिक काम काज के साथ साथ खुदा की इबादत करता है पुरे तीस रोज़े रखने या इसके पूर्व चाँद दिखने के बाद फितरा जकात देकर गरीबों में समाजवाद का सिद्धांत लागू कर उनकी जरूरत के मुताबिक कपडे और नकदी वितरित किया जाता है और फिर सभी लोग अपनी इस इबादत को बखूबी पूरी होने पर या खुद के पास होने की ख़ुशी में खुशियाँ मनाते हैं जिसे ईद कहा जाता है इस दिन फ़ित्र निकाला जाता है इसलियें इसे इदुल्फित्र कहते हैं ...........रोज़े ली आठ किसमे होती हैं फ़र्जे मुअय्यन,फ्र्ज़े गेर मुअय्यन,वाजिब मुअय्यन, वाजिब गेर मुअय्यन ,सुन्नत ,नफिल, मकरूह , हराम ...साल भार में एक माह के रोज़े यानि रमजान माह के रोज़े रोज़े मुअय्यन हैं ....अगर मजबूरी की वजह से छूटे रोजों को रखे जा रहे हो तो वोह रोज़े गेर मुअय्यन हैं ....किसी मन्नत यानि किसी खास दिन खास ख्वाहिश पूरी होने पार रोज़े मने जाते हैं तब ऐसे रोज़े को वाजिब मुअय्यन कहते हैं ....आशुरे के दो रोज़े ,मुहर्रम के नवीं और दसवीं तारीख के दो रोज़े अर्फे का रोजा और हर महीने की तेरह ,चवदा , पन्द्राह रोज़ा रखना सुन्नत है ..सवाल के महीने के छ रोज़े , शबन के महीने की पन्द्रह तारीख का रोज़ा , जुमे के दिन का रोज़ा पीर के दिन का रोजा ..जुमेरात के दिन का रोजा मुस्तहब रोज़े हैं लेकिन सनीचर का रोजा और बिना शोहर यानि पति की अनुमति के राख गया न्फ्ली रोजा मकरूह हैं ...इसके आलावा दोनों ईद त्श्रीक के दिन के तीन रोज़ेजो हज की ग्यारवीं ,बाहरवीं ,तेरहवीं तारीख को होते हैं अगर रखे जाते हैं तो हराम हैं ......हमारे देश में रोज़े के नाम पार राजनीति भी शुरू हो गयी है सयासी लोग रोज़े अफ्तार के नाम पार लोगों को बुला कर मोलाना मोलवियों की खरीद फरोख्त कर अपने कार्यक्रम बनाते हैं और लुभावनी बातें कर मुसलमानों को इस दिन बहकाते हैं लेकिन आम रोज़ेदार मुसलमानों को इन सियासी लोगों के खेलों से दूर रहना चाहिए और इनकी मजलिस की भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए क्योंकि रोजा अफ्तार हलाल रोज़ी से हो यह ध्यान रखना जरूरी है सियासी रोज़े कोन अफ्तार करा रहा है इसका रुपया कहाँ से आ रहा है हलाल का है या हराम का है कह नहीं सकते लेकिन अगर मजबूरी हो तो खुद की खजूर जेब में रख कर साथ ले जाओ और रोजा अफ्तार उसी खजूर से करो ताकि गुनाह से बच सकों .................अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान  

-- ब्लोगर मीट वीकली के माध्यम से भाई अनवर और प्रेरणा ने सभी ब्लोगर्स को एक माला में बाँध लिया है


              दोस्तों आप सभी जानते हैं के ब्लोगिंग की दुनिया में डोक्टर अनवर जमाल की क्या शख्सियत है ..वोह जो लिखते हैं दिल से लिखते हैं ..और लिखते हैं तो बस लिखते ही रहते हैं ..उनके लिखने के अपने अंदाज़ से ब्लोगिंग के कई महाराज उनसे कुछ दिन खफा जरुर रहे ..डोक्टर अनवर जमाल और कुछ लोगों के बीच तकरार रही लेकिन अब खुदा का शुक्र है के माहोल दोस्ताना है परिवाराना हैं और खुश गवार माहोल में ब्लोगिग्न चल रही है ..लेकिन दोस्तों डोक्टर अनवर जमाल ने इन दिनों जो कमाल क्या है उससे ब्लोगिंग के कई लोग जो दबे कुचले कोने में एक तरफ बेठे थे वोह अब सीना ताने खड़े हैं और उन्हें भाई अनवर जमाल ने ब्लोगिग्न की खबरें और खुद के कई ब्लॉग पर स्थान दिया है .साथ ब्लोगरों को अधिक से अधिक लोग पढ़ें इसके लियें भाई अनवर जमाल ने एक कमाल और क्या है ..इधर उधर बिखरे पड़े ब्लोगों को सजा संवार कर एक माला में गूँथ कर उन्होंने अपनी एक महिला ब्लोगर साथी प्रेरणा के साथ ब्लोगर मीट वीकली का प्रसारण शुरू कर दिया है ......भाई अनवर के इस सपने को साकार करने में बहन प्रेरणा अर्गल  ने पूरा सहयोग दिया है बंगाल की रहने वाली प्रेरणा जी सभी ब्लोगर्स के ब्लॉग समेटती हैं और फिर एक वीकली ब्लॉग मीट में हम जेसे लोगों के सामने परोस देती हैं .............दोस्तों भाई अनवर के इस प्रयास ने ब्लोगिग्न की दुनिया में खलबली मचा दी है ..जिस भाई अनवर की पोस्टों को निजी कारणों से एग्रीगेटरों से हटा दिया जाता था आज वोह खुद दुसरे लोगों की पोस्टों का प्रकाशन प्रचार प्रसार कर रहे हैं ..उनकी इसी महनत और लगन का नतीजा है के आज वोह प्रमुख ब्लोगरों में गिने जाने लगे हैं जो लोग उन्हें टिपण्णी देना तो दूर उनके ब्लॉग से खिसक लिया करते थे आज उनके ब्लॉग को वोह पूरा पढ़ कर टिप्पणिया देने के लियें मजबूर हो गए हैं ........भाई अनवर ने खुद तो बहतरीन ब्लोगिरी की ही है साथ ही अपने साथियों के साथ जो सहयोगी ब्लॉग बनाए हैं उसकी कामयाबी से सभी ब्लोगर्स हेरान हैं ..और आज हालात यह हैं के वोह दूसरों के ब्लॉग को वीकली ब्लोगर्स मीट में स्थान दे रहे हैं ...........भाई अनवर की इस कोशिश .इस कामयाम कोशिश और महनत से सभी ब्लोगर भाइयों को एक बात तो सीखने को मिली है के कोई काम नहीं है मुश्किल जब किया इरादा पक्का ..दूसरी बात विकट परिस्थितयों में भी अगर कोई हिम्मत नहीं हरे और पत्थर से टकराने का उसमे होसला हो तो वोह जीतता और सिर्फ जीतता ही है ........भाई अनवर ने खुदी को इतना बुलंद किया है के हर ब्लोगर उनसे पूंछने लगा है के बता तेरी रजा क्या है ....भाई अनवर के ब्लॉग को जब एग्रीगेटरों से हटाया जाने लगा उनके ब्लॉग एक विशेष लोगों के बनाये गए कोकस की उपेक्षा के शिकार हुए तब भाई अनवर हिम्मत नहीं हारे और उन्होंने इस शेर को सही साबित कर दिखाया के ....नशेमन पर नशेमन इस क़दर तामीर करता जा के बिजलियाँ आप बेज़ार हो जाएँ गिरते गिरते और भाई अनवर ने कुछ ऐसी ही महनत की ऐसी ही हिम्मत दिखाई के उन्होंने छोटे ब्लोगर्स को एक साहस दिया , एक ताकत दी , मान सम्मान  और प्रतिष्ठा दी ..टिप्पणियों का कोकस खड़ा कर खुद अपने ही लोगों को टिपण्णी करने की परम्परा के शिकार जो अली बाबा चालीस चोर बने थे उन्हें गिरफ्त में लिया उन्हें  उनकी भूल का एहसास दिलाया और आज देखलो ब्लोगिग्न की दुनिया में फिर से भाईचारा सद्भाव और प्यार कायम है ..भाई अनवर का साथ दे रही हैं प्रेरणा अर्गल जो रोज़ मर्रा ब्लोगर मीट वीकली के लियें ब्लोगों को खुशबूदार फूलों की तरह चुनती है एक माला बनाती है और फिर ब्लोगिंग की दुनिया को प्यार दुलार और अपनेपन की खुशबु से महका देती है ..ब्लोगिंग के इस कामयाब सफ़र के लियें भाई अनवर और प्रेरणा बहन को बधाई .ब्लोगिंग के इस सिपाही का सेल्यूट है ........अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

07 अगस्त, 2011

सुदामा कृष्णा की दोस्ती भुलाकर हम विदेशियों की दोस्ती की बात करते हैं और खुद को शर्मसार करते हैं

दोस्तों आज में हेरान और परेशान हूँ आज सुबह से सभी हैप्पी फ्रेंडशिप दे मना रहे है एक दुसरे को संदेश और झंसेबाज़ी दे रहे हैं मन में क्या है लेकिन सन्देश में एक दुसरे के लिए प्यार और दोस्ती की तड़प बता रहे हैं ..बच्चे हैं के शोक में एक दुसरे को फ्रेंडशिप बेंड बाँध रहे हैं ...........देश में अब विदेश की कई बातों का असर खूब आ गया है फ्रेंड शिप दोस्तों ने मनाया हो या ना मनाया हो लेकिन फ्रेंडशिप बेंड और फ्रेंडशिप गिफ्ट बनाने वालों के साथ साथ मोबाइल मेसेज कम्पनियों के मज़े हो गए हैं और आज के दिन उन्होंने करोड़ों करोड़ रूपये हमारे देश के भोले भाले जज्बाती लोगों से कमा लिए हैं .......दोस्तों फ्रेंड शिप दे जो यु के में १९३५ में एक अपराधी को जब वहां के पुलिस ने अगस्त के प्रथम शनिवार को म्रत्युदंड दिया तब उसके एक मित्र ने अपने म्र्तक दोस्त की याद में दुसरे दिन जज्बाती होकर आत्महत्या कर ली और जान दे डाली बस यु के के लोगों को एक दोस्त का दोस्त के लियें जान देने का यही अंदाज़ पसंद आया और जब से ही अगस्त महीने के पहले रविवार को फ्रेंडशिप दे मनाने की घोषणा कर दी ..आर एस एस और भाजपा के लोग जो स्वदेशी आन्दोलन की बात करते हैं गाँधीवादी लोग जो चरखे और खादी की बात करते हैं वोह सभी इस रंग में बस गए हैं ......दोस्तों में नहीं समझता इस दिन को हमारे लियें मनाना गर्व की बात हो लेकिन हाँ दोस्ती की मिसाल हमारे देश में क्रष्ण सुदामा और ना जाने कितने लोग रहे हैं हम हमारे देश में उन लोगों को याद  करके कभी भी उनके नाम पर कोई दिवस नहीं मनाते और इसीलियें हम हमारे देश हमारी संस्क्रती से दूर होते जा रहे हैं और नतीजे घर घर बिखरते परिवारों के रूप में देखने को मिल रहे हैं एक व्यक्ति सडक पर घायल पड़ा रहता है तड़प तड़प कर इलाज के आभाव में जान दे देता है लेकिन मानवता के नाते कोई उसे अस्पताल लेजाने की जुर्रत नहीं करता एक आदमी चाकू की नोक पर सरेआम एक लडकी को उठा कर लेजाता है उसके साथ बलात्कार करता है लेकिन उसे बचने के लियें कोई स्वदेशी नहीं आता .चलो तात्कालिक रूप से बचाना मुश्किल भी हो अगर तो उस अपराधी के पकड़े जाने  पर उसे सजा दिलवाने के लियें कोई भी खुलकर अदालत में ब्यान नहीं देता है ऐसे न जाने कितने किस्से हैं जो हम और हमारे देश वासी राष्ट्रहित में पूरा नहीं करते हैं लेकिन ऐसे दिवस जिसका हमारे देश हमारी संस्क्रती से कोई लेना देना नहीं है उसपर करोड़ों करोड़ रूपये और अपना बेशकीमती वक्त बर्बाद कर डालते हैं तो दोस्तों  नाराज़ ना होना अपना तो रोज़ ही फ्रेंडशिप दिवस है एक दिन तो दिवस वोह लोग मनाते हैं जो साल भर बेवफाई कर केवल एक दिन का दिखावा करते हैं हम और आप तो आजीवन  अटूट दोस्ती के रिश्ते में बंधे हैं इसलियें यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे दोस्तों ..............अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

28 जुलाई, 2011

दोस्तों आज मेरे बढे भाई समीर लाल जी का जन्म दिन है


दोस्तों आज मेरे बढे भाई समीर लाल जी का जन्म दिन है उनकी उड़न तश्तरी का जबलपुर से कनाडा तक का सफ़र तो आप सभी को पता है ......अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी ब्लोगिग्न और हिंदी भाषा के खुबसूरत रंग भरने वाले भाई समीर लाल जी को उनके जन्म दिन पर हार्दिक बधाई ..भाई  समीर लाल जी  हर छोटे बढे ब्लॉग पर जाकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं खट्टे मीठे अनुभव बांटते है और इसीलियें वोह आज हर दिल अज़ीज़ ब्लोगर बन गए है ..कनाडा की एजेक्स , ओटोरियों कम्पनी में सलाहकार का काम कर रहे भाई समीर ब्लोगर्स को भी बहतर प्रदर्शन की सलाह की ज़िम्मेदार बखूबी निभा रहे है ......भाई समीर की उड़नतश्तरी के अलावा लाल और बवाल जुगलबंदी भी ज़ोरों पर है ऐसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्क्रती और हिंदी भाषा के प्रचारक , साहित्यकार , कवि भाई समीर लाल को एक बार फिर उनके जन्म दिन पर हार्दिक बधाई ..उनके कुछ अलफ़ाज़ उनकी ताज़ी रचना में प्रकाशित है इस रचना में उनके एक मुकम्म्मल और अच्छे इंसान होने का दर्पण है जो हू बहु पेश है ....अख्तर खान अकेला कोटा राजस्थान

चलती सांसो का सिलसिला....

अपनी लम्बी यॉर्क, यू के की यात्रा को दौरान जब अपनी नई उपन्यास पर काम कर रहा था तो अक्सर ही घर के सामने बालकनी में कभी चाय का आनन्द लेने तो कभी देर शाम स्कॉच के कुछ घूँट भरने आ बैठता और साथ ही मैं घर के सामने वाले मकान की बालकनी में रोज बैठा देखता था उस बुजुर्ग को.
उसके चेहरे पर उभर आई झुर्रियाँ उसकी ८० पार की उम्र का अंदाजा बखूबी देती. कुर्सी के बाजू में उसे चलने को सहारा देने पूर्ण सजगता से तैनात तीन पाँव वाली छड़ी मगर उसे इन्तजार रहता दो पाँव से चल कर दूर हो चुके उस सहारे का जिसे उसने अपने बुढ़ापे का सहारा जान बड़े जतन से पाल पोस कर बड़ा किया था. जैसे ही वह इस काबिल हुआ कि उसके दो पैर उसका संपूर्ण भार वहन कर सकें, तब से वो ऐसा निकला कि इस बुजुर्ग के हिस्से में बच रहा बस एक इन्तजार. शायद कभी न खत्म होने वाला इन्तजार.
बालकनी में बैठे उसकी नजर हर वक्त उसके घर की तरफ आती सड़क पर ही होती. साथ उसकी पत्नी, शायद उसी की उम्र की, भी रहती है उसी घर में. वो ही सारा कुछ काम संभालते दिखती. कुछ कुछ घंटों में चाय बना कर ले आती, कभी सैण्डविच तो कभी कुछ और. दोनों आजू बाजू में बैठकर चाय पीते, खाना खाते लेकिन आपस मे बात बहुत थोड़ी सी ही करते. शायद दोनों को ही चुप रहने की आदत हो गई थी या इतने साल के साथ के बाद अकेले में एक दूसरे से कहने सुनने के लिए कुछ बचा ही न हो. कुछ नया तो होता नहीं था. वही सुबह उठना, दिन भर बालकनी में बिताना और ज्यादा से ज्यादा फोन पर ग्रासरी वाले को सामान पहुँचाने के लिए कह देना. पत्नी बीच बीच में उठकर गमलों में पानी डाल देती. उनमें भी जिसमें अब कोई पौधा नहीं बचा था. जाने क्या सोच कर वो उसमें पानी डालती थी. शायद वैसे ही, जैसे जानते हुए भी कि अब बेटा अपनी दुनिया में मगन है, वो कभी नहीं आयेगा- फिर भी निगाह घर की ओर आने वाली सड़क पर उसकी राह तकती.
उनके घर से थोड़ा दूर सड़क पार उसकी पत्नी की कोई सहेली भी रहती थी. नितांत अकेली. कई महिनों में दो या तीन बार इसको उसके यहाँ जाते देखा और शायद एक बार उसे इनके घर आते. जिस रोज वो उसके यहाँ जाती या वो इनके यहाँ आती, उस शाम पति पत्नी आपस में काफी बात करते दिखते. शायद कुछ नया कहने को होता.
अक्सर मेरी नजर अपनी बालकनी से उस बुजुर्ग से टकरा जाती. बस, एक दूसरे को देख हाथ हिला देते. शायद उसने मेरे बारे में अपनी पत्नी को बता दिया था. अब वो भी जब बालकनी में होती तो हाथ हिला देती. हमारे बीच एक नजरों का रिश्ता सा स्थापित हो गया था. बिना शब्दों के कहे सुने एक जान पहचान. मैं अक्सर ही उन दोनों के बारे में सोचा करता. सोचता कि ये बालकनी में बैठे क्या सोचते होंगे?  क्या सोच कर रात सोने जाते होंगे और क्या सोच कर नया दिन शुरु करते होंगे?
मुझे यह सब अपनी समझ के परे लगता. कभी सहम भी जाता, जब ख्याल आता कि यदि इस महिला को इस बुजुर्ग के पहले दुनिया से जाना पड़ा तो इस बुजुर्ग का क्या होगा? मैने तो उसे सिर्फ छड़ी टेककर बाथरुम जाते और रात को अपने बिस्तर तक जाने के सिवाय कुछ भी करते नहीं देखा. यहाँ तक की ग्रासरी लाने का फोन भी वही महिला करती. तरह तरह के ख्याल आते. मैं सहमता, घबराता और फिर कुछ पलों में भूल कर सहज हो जाता हूँ.
मैं भरी दुपहरी अपने बंद अँधेरे कमरे में ए सी को अपनी पूरी क्षमता पर चलाये चार्ल्स डी ब्रोवर की पुस्तक ’फिफ्टी ईयर्स बिलो ज़ीरो’ को पढ़ता आर्कटिक अलास्का की ठंड की ठिठुरन अहसासता भूल ही जाता हूँ कि बाहर सूरज अपनी तपिश के तांडव से न जाने कितने राहगीरों को हालाकान किये हुए है. कितना छोटा आसमान बना लिया है हमने अपना. कितनी क्षणभंगुर हो चली है हमारी संवेदनशीलता भी. बहुत ठहरी तो एक आँसूं के ढुलकने तक.
समय के पंख ऐसे कि कतरना भी अपने बस में नहीं तो उड़ चला. कनाडा वापसी को दो तीन दिन बचे. उस शाम बहाना भी अच्छा था कि अब तो वापस जाना है और कुछ मौसम भी ऐसा कि वहीं बालकनी में बैठे बैठे नियमित से एक ज्यादा ही पैग हो गया स्कॉच का. शराब पीकर यूँ भी आदमी ज्यादा संवेदनशील हो जाता है और उस पर से एक्स्ट्रा पी कर तो अल्ट्रा संवेदनशील. कुछ शराब का असर और कुछ कवि होने की वजह से परमानेन्ट भावुकता का कैरियर मैं एकाएक उन बुजुर्गों की हालत पर अपने दिल को भर बैठा याने दिल भर आया उनके हालातों पर. सोचा, आज जा कर मिल ही लूँ और इसी बहाने बता भी आऊँगा कि दो दिन में वापस कनाडा जा रहा हूँ. एक बार को थोड़ा सा अनजान घर जाते असहजता महसूस हुई किन्तु शराब ने मदद की और मैं अपनी सीढ़ी से उतर कर उनकी सीढ़ी चढ़ते हुए उनकी बालकनी में जा पहुँचा.
वो मुझे देखकर जर्मन में हैलो बोले. जर्मन मुझे आती नहीं, मैने अंग्रेजी में हैलो कहा. हिन्दी में भी कहता तो शायद उनके लिए वही बात होती क्यूँकि अंग्रेजी उस बुजुर्ग को आती नहीं थी. इशारे से वो समझे और इशारे से ही मैं समझा. फिर उनका इशारा पा कर उनके बाजू वाली कुर्सी पर मैं बैठ गया. उनकी गहरी ऑखों में झांका. एकदम सुनसान, वीरान. मैने उनके हाथ पर अपना हाथ रखा. भावों ने भावों से बात की. शायद एक लम्बे अन्तराल के बाद किसी तीसरे व्यक्ति का स्पर्श पा दबे भावों का सब्र का बॉध टूटने की कागर पर आ गया हो. उनकी आँखें नम हो आईं. मैं तो यूँ भी अल्ट्रा संवेदनशील अवस्था में था. अति संवेदनशीलता में शराब आँख से आँसू बनकर टप टप टपकने लगी. बुजुर्ग भी रो दिये और मेरा जब पूरा एक्स्ट्रा पैग टपक गया, तो मैं उठा. उन्हें हाथ पर थपकी दे ढाढस बँधाई और उन्हें नमस्ते कर बिना उनकी तरफ देखे सीढ़ी उतर कर लौट आया.
सुबह उठकर जब उनकी बालकनी पर नजर पड़ी तो वह बुजुर्ग हाथ हिलाते नजर आये. एक बार फिर मेरी आँख नम हुई यह सोचकर कि कल से यह मेरा भी इन्तजार करेंगे हाथ हिलाने को. आँख में आई नमी ने अहसास करा दिया कि कल जो बहा था वो शराब नहीं थी. दिल की किसी कोने से कोई टीस उठी थी उस एकाकीपन और नीरसता को देख, जो आज न जाने उस जैसे कितने बुजुर्गों की साथी है....